Explained: बीजेपी ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में CM पद के लिए क्यों चुने नए चेहरे?
बीजेपी ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए नए चेहरों को मौका दिया है, आखिर बीजेपी ने क्यों किया ऐसा?
बीजेपी ने विष्णु देव साय (सबसे बाएं) को छत्तीसगढ़, मोहन यादव (बीच में) को मध्य प्रदेश और भजनलाल शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री चुना।
BJP Chose 3 New CMs Faces for Chhatisgarh, MP, RAJ: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीनों राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान) में नए मुख्यमंत्रियों को चुनते हुए सबको चौंका दिया है।
बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के लिए विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai), मध्य प्रदेश के लिए मोहन यादव (Mohan Yadav) और राजस्थान के लिए भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) को मुख्यमंत्री चुना है। बीजेपी के इस फैसले ने सभी राजनीतिक विश्लेषकों को क्लीन बोल्ड कर दिया है और इन तीनों राज्यों में सीएम पद को लेकर लगाई जा रही सारी अटकलें गलत साबित हुईं।
उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़, जहां आदिवासियों की आबादी 32 फीसदी है, वहां से बीजेपी ने एक आदिवासी नेता को चुना है। पार्टी यहां से ओबीसी या अन्य पिछड़ी जातियों से आने वाले सीएम को भी चुन सकती थी, लेकिन आदिवासी बाहुल्य इलाकों में दमदार प्रदर्शन ने इसी समुदाय के मुख्यमंत्री के चयन में अहम भूमिका निभाई।
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए बीजेपी को और माथापच्ची करनी पड़ी मुख्यमंत्री के साथ ही उसे दो उपमुख्यमंत्रियों और स्पीकर को भी चुनना पड़ा। पार्टी को उम्मीद होगी कि इन फैसलों से वह 2024 चुनावों के लिए विभिन्न समुदायों और उनके राजनीतिक प्रतिनिधियों को खुश करने में कामयाब रहेगी।
बीजेपी ने मध्य प्रदेश में अब यादव समुदाय (एक ओबीसी) से मुख्यमंत्री (मोहन यादव), दलित (जगदीश देवड़ा) और ब्राह्मण (राजेंद्र शुक्ला) के रूप में दो उपमुख्यमंत्रियों को चुना है, और एक ठाकुर (पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, जिन्हें कुछ लोग संभावित मुख्यमंत्री के रूप में भी देख रह थे) को विधानसभा अध्यक्ष के रूप में चुना है।
और राजस्थान-जहां ब्राह्मण समुदाय की आबादी लगभग 7 प्रतिशत है, वहां मुख्यमंत्री के रूप में एक ब्राह्मण भजनलाल शर्मा को चुना है और राजपूत समुदाय से आने वालीं दीया कुमारी और दलित समुदाय से आने वाले प्रेम चंद बैरवा को उपमुख्यमंत्री चुना है।
ये नई बात नहीं है कि बीजेपी या कोई भी पार्टी चुनावी रूप से महत्वपूर्ण समुदायों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्रियों या मंत्रियों को चुनती है।
अब सवाल ये है कि हाल में तीनों राज्यों में विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल करने के बाद बीजेपी ने इन तीनों ही राज्यों में पहले रह चुके अपने मुख्यमंत्रियों को फिर से मौका देने के बजाय नए चेहरों पर क्यों दांव लगाया?
बीजेपी ने क्यों चुने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए नए चेहरे?
छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री-विष्णु देव साय
बीजेपी ने विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ के आदिवासी बेल्ट सुरगौजा और बस्तर में 26 में से 22 सीटें जीतीं, इसलिए पार्टी के पास इस समुदाय के ही किसी सदस्य को सीएम पद पर चुनने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं थे और इसलिए उन्होंने आदिवासी समुदाय से आने वाले विष्णु देव साय को मुख्यमंत्री चुना।
चुनाव प्रचार के दौरान भी पार्टी ने आदिवासियों तक लगातार पहुंच बनाने की कोशिश होती रही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार राज्य की आदिवासी विरासत की प्रशंसा करना और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जिक्र करना और खुद के ”आदिवासियों की सेवा के लिए पैदा”होने जैसी बातों ने बीजेपी को विधानसभा चुनावों में वोट हासिल करने में काफी मदद की।
हालांकि बीजेपी ने विष्णु देव साय को सीएम केवल आदिवासी वोटर्स को साधने के लिए नहीं चुना, बल्कि पार्टी इसके जरिए 2024 लोकसभा चुनावों के लिए कई राज्यों तक असर छोड़ना चाहती है।
छत्तीसगढ़ से लगने वाले छह सीमावर्ती राज्यों में से दो मध्य प्रदेश और झारखंड में आदिवासिओं की अच्छी खासी आबादी (क्रमश: करीब 22 से 26 फीसदी) है। वहीं छत्तीसगढ़ के एक और सीमावर्ती राज्य ओडिशा, जोकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का गृहराज्य है, वहां आदिवासियों की जनसंख्या 23 फीसदी से ज्यादा है।
साय को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री चुनने से बीजेपी को 2024 चुनावों से पहले खुद को इन राज्यों में आदिवासियों के हिमायती के रूप में दिखाने में मदद मिलेगी। इन चार राज्यों में 75 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से 20 सीटें आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षित हैं, और साथ ही करीब एक दर्जन सीटों पर आदिवासियों का प्रभाव है।
मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री-मोहन यादव
मध्य प्रदेश में भी बीजेपी ने आदिवासी वोट हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की और नतीजा उन्हें ST उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 47 विधानसभा सीटों में से 24 सीटें मिल गईं।
इस समुदाय को खुश करने के लिए जगदीश देवड़ा को डेप्युटी सीएम बनाया गया है। साथ ही एक ब्राह्मण को डेप्युटी सीएम बनाकर पार्टी ने सवर्ण वोटर्स को भी खुश रखने की कोशिश की है, जिनके बीच 2003 से ही पार्टी की पैठ रही है।
मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने राजनीतिक रूप से अहम उत्तर प्रदेश और बिहार पर भी निशाना लगाया है, जहां से अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में 120 सांसद चुनकर आएंगे।
अगर बीजेपी इन दो राज्यों में जोरदार प्रदर्शन करने में सफल रही तो विपक्ष के लिए मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से रोकना मुश्किल हो जाएगा।
लेकिन मोहन यादव के मध्य प्रदेश का सीएम बनने की इसमें क्या भूमिका हो सकती है? मध्य प्रदेश में यादव वोटर्स की संख्या केवल छह फीसदी है। हालांकि यादव बिहार (करीब 14 फीसदी) में सबसे बड़ा ओबीसी समूह है और यूपी में उनकी जनसंख्या करीब 10 फीसदी है, यानी तीनों राज्यों में मिलाकर करीब 30 फीसदी यादव वोटर्स हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में एक यादव चेहरे को चुनकर बीजेपी ने इन तीनों राज्यों के यादव समुदाय के वोटर्स को उनके सशक्तिकरण का संदेश देने की कोशिश है, जो लोकसभा में 149 सांसद भेजते हैं।
इसे विपक्ष में मौजूद ताकतवर यादव नेताओं के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है- जिनमें उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव शामिल हैं।
राजस्थान: मुख्यमंत्री- भजनलाल शर्मा
राजस्थान में बीजेपी ने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री चुनकर सबको चौंका दिया। शर्मा पहली बार विधायक बने हैं और संघ से लंबे समय से जुड़ाव ने ही उनको सीएम पद तक पहुंचने में अहम योगदान दिया।
राजस्थान का सीएम बनने की रेस में सिंधिया राजघराने से आने वाली और दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे सिंधिया सबसे आगे थीं। वसुंधरा का स्थानीय बीजेपी नेताओं पर जबर्दस्त प्रभाव है और जनता भी उन्हें काफी पसंद करती है।
तो आखिरी बीजेपी ने वसंधुरा के बजाय एक नए चेहरे को सीएम क्यों चुना? तो ऐसा लगता है कि बाकी दो राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश) की तरह ही इस कदम के पीछे भी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव हैं।
राजस्थान में ब्राह्मण राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नहीं हैं। हालांकि, पड़ोसी राज्यों का संयुक्त आंकड़ा ब्राह्मणों को बीजेपी के लिए संभावित रूप से अहम वोट बैंक बनाता है, जिनकी मदद से वह पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर सकती है।
यूपी, जो राजस्थान की पूर्वोत्तर सीमा से लगा हुआ है, ब्राह्मण आबादी लगभग 10 प्रतिशत है – जो ‘सामान्य श्रेणी’ के मतदाताओं में सबसे बड़ा वोट बैंक है। हरियाणा में ब्राह्मणों की संख्या और भी ज्यादा (लगभग 12 प्रतिशत) है। वहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ये करीब पांच-पांच फीसदी हैं।
ये चारों राज्य लोकसभा में 145 सांसद भेजते हैं, जिनमें से 114 ‘सामान्य श्रेणी’ सीटों से हैं।
इतनी बड़ी सीटों की संख्या को बीजेपी नजरअंदाज नहीं कर सकती, भले ही ब्राह्मण उसके मूल वोट बैंक का हिस्सा न हों। शायद इसीलिए उसने राजस्थान में ब्राह्मण समुदाय से आने वाले मुख्यमंत्री को चुना है।
जयपुर के पूर्व शाही परिवार की सदस्य दीया कुमारी को उपमुख्यमंत्री चुना गया है, जोकिदो भूमिकाओं में फिट बैठती हैं-एक राजपूत चेहरा और एक महिला नेता। दूसरे उपमुख्यमंत्री – प्रेम बैरवा – दलित समुदाय से आते हैं।
